राजनीतिक विचारधारा गाइड

सामाजिक लोकतंत्र

कमाई प्राइवेट, सुविधाएँ मुफ़्त वामपंथी

कारोबार को कमाने दो, फिर न्यायपूर्ण टैक्स से हर किसी को अच्छे स्कूल, इलाज और सुरक्षा घेरा दो।

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आसान भाषा में

एक ऐसे शहर की कल्पना कीजिए जहाँ कोई भी दुकान खोल सकता है, कारख़ाना लगा सकता है या कंपनी बनाकर अमीर बन सकता है। यह बाज़ार वाला हिस्सा है। अब सोचिए कि वही शहर टैक्स लेता है, जो ज़्यादा कमाता है उससे थोड़ा ज़्यादा, और उस पैसे से अच्छे मुफ़्त स्कूल, सस्ते या मुफ़्त अस्पताल, बुज़ुर्गों के लिए पेंशन और नौकरी छूटने पर मदद देता है। यह 'सामाजिक' हिस्सा है।

सामाजिक लोकतंत्र के समर्थक ये दोनों चीज़ें एक साथ चाहते हैं। वे साम्यवादियों की तरह हर कारोबार सरकार के हाथ में नहीं देना चाहते। लेकिन वे पूरी तरह खुले बाज़ार पर भी भरोसा नहीं करते, क्योंकि उसमें बीमार, बुज़ुर्ग और ग़रीब पीछे छूट सकते हैं। इसलिए वे निजी कारोबार और आज़ाद चुनाव बनाए रखते हैं, और साथ में मज़बूत नियम जोड़ते हैं: सही मज़दूरी, सुरक्षित कामकाज, यूनियन बनाने का हक़, और ऐसी सेवाएँ जिनका हर नागरिक इस्तेमाल कर सके।

स्वीडन, नॉर्वे और डेनमार्क इसके सबसे मशहूर उदाहरण हैं। भारत में भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और ग्रामीण रोज़गार गारंटी जैसे क़ानून इसी सोच पर चलते हैं।

मुख्य विचार

राजनीतिक नक़्शे पर इसकी जगह

ideoMap के चार पैमानों पर इसकी आम जगह।

💰 अर्थव्यवस्थासामाजिक लोकतंत्रवादी
👪 समाजप्रगतिशील
🛡️ नागरिक आज़ादीनागरिक स्वतंत्रतावादी
🌍 विश्व राजनीतिअंतरराष्ट्रीयतावादी
सत्तास्वतंत्रतावामदक्षिण

जब यह कामयाब रहा

प्रेरक उदाहरण

ब्रिटेन की मुफ़्त सरकारी स्वास्थ्य सेवा (NHS)

ब्रिटेन · 1948 से

दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन ने टैक्स के पैसे से डॉक्टर और अस्पताल सबके लिए मुफ़्त कर दिए। आज भी फ़ैमिली डॉक्टर को दिखाने या इमरजेंसी इलाज का कोई बिल नहीं आता।

प्रेरक उदाहरण

नॉर्डिक कल्याणकारी मॉडल

स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क · 1930 के दशक से

IKEA, Volvo और LEGO जैसी निजी कंपनियाँ दुनिया भर में मशहूर हुईं, और टैक्स से मुफ़्त स्कूल-कॉलेज, इलाज और बच्चे के जन्म पर माता-पिता को लंबी सवेतन छुट्टी मिली। ये देश दुनिया की ख़ुशहाली रिपोर्टों में लगातार सबसे ऊपर के देशों में रहते हैं।

प्रेरक उदाहरण

भारत की ग्रामीण रोज़गार गारंटी (मनरेगा)

भारत · 2005 से

हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन तक मज़दूरी वाले काम का क़ानूनी हक़ मिला, ताकि ख़राब फ़सल वाले साल में भी घर में कुछ कमाई आती रहे।

जब यह नाकाम रहा

सबक़ देने वाला उदाहरण

ग्रीस का क़र्ज़ संकट

ग्रीस · 2009–2018

बरसों तक उधार के पैसे से भारी पेंशन और सरकारी नौकरियाँ बाँटी गईं; नतीजा तीन अंतरराष्ट्रीय बेलआउट, अर्थव्यवस्था लगभग एक-चौथाई सिकुड़ गई और आधे से ज़्यादा युवा बेरोज़गार हो गए।

सबक़ देने वाला उदाहरण

स्वीडन का 102% टैक्स

स्वीडन · 1976

टैक्स इतने बढ़ गए कि 'पिप्पी लॉन्गस्टॉकिंग' की मशहूर लेखिका एस्ट्रिड लिंडग्रेन ने हिसाब लगाया कि उन्हें अपनी कमाई के एक हिस्से पर 100% से भी ज़्यादा टैक्स देना है। इस पर लिखी उनकी व्यंग्य-कथा से पूरे देश में बहस छिड़ी, और उसी साल सोशल डेमोक्रेट 44 साल में पहली बार सत्ता से बाहर हो गए।

समर्थक क्या कहते हैं

  • सबको बराबर शुरुआत मिलती है: ग़रीब बच्चे को भी वही स्कूल और अस्पताल मिलता है जो अमीर बच्चे को।
  • कारोबार और खुले बाज़ार की ताक़त बनी रहती है, इसलिए अर्थव्यवस्था बढ़ती रहती है।
  • सुरक्षा घेरा लोगों को हिम्मत देता है: वे बर्बादी के डर के बिना नौकरी बदल सकते हैं या अपना काम शुरू कर सकते हैं।

आलोचक क्या कहते हैं

  • ऊँचे टैक्स मेहनती लोगों और कंपनियों को विदेश जाने या कमाई छिपाने पर मजबूर कर सकते हैं।
  • भारी सुविधाएँ बहुत महँगी पड़ती हैं; विकास धीमा होते ही सरकार उधार लेती है और क़र्ज़ बढ़ता जाता है, जैसा ग्रीस में हुआ।
  • बड़ी सरकार धीमी और फ़िज़ूलख़र्च बन सकती है, और कुछ लोग काम करने के बजाय सरकारी मदद पर निर्भर हो सकते हैं।

जानी-मानी हस्तियाँ

आम सवाल

क्या सामाजिक लोकतंत्र और समाजवाद एक ही चीज़ हैं?

नहीं। समाजवादी चाहते हैं कि ज़्यादातर कारोबार सरकार या मज़दूरों के हाथ में हों। सामाजिक लोकतंत्र निजी मालिकाना हक़ और बाज़ार बनाए रखता है, और टैक्स व क़ानूनों के ज़रिए फ़ायदे को ज़्यादा बराबरी से बाँटता है। लोकतांत्रिक समाजवाद इन दोनों के बीच में आता है।

क्या भारत एक सामाजिक लोकतंत्र है?

पूरी तरह नहीं, लेकिन भारत की व्यवस्था के कई हिस्से इसी सोच पर चलते हैं: मुफ़्त सरकारी स्कूल, राशन की दुकानों से सस्ता अनाज, ग्रामीण रोज़गार गारंटी और श्रम क़ानून। भारत का संविधान भी नीति-निर्देशक तत्वों में सरकार से असमानता घटाने और काम, शिक्षा व सरकारी मदद देने को कहता है।

कौन-से देश यह मॉडल अपनाते हैं?

नॉर्डिक देश, यानी स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क, फ़िनलैंड और आइसलैंड, इसके सबसे जाने-माने उदाहरण हैं, चाहे वहाँ किसी भी पार्टी की सरकार हो। जर्मनी, नीदरलैंड और कनाडा भी खुले बाज़ार के साथ मज़बूत कल्याणकारी व्यवस्था चलाते हैं।

मिलती-जुलती विचारधाराएँ

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ये उदाहरण सोचने में मदद के लिए आसान बनाकर लिखे गए हैं। इनका मक़सद किसी देश, पार्टी या लोगों की तारीफ़ या बुराई करना नहीं है।