प्रेरक उदाहरण
भारतीय रियासतों का एकीकरण
भारत · 1947–1949
सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने अदम्य साहस और दृढ़ कूटनीति से क़रीब 560 रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कर देश के टुकड़े होने से बचाया और एक संप्रभु, अखंड गणराज्य की नींव रखी।
राजनीतिक विचारधारा गाइड
राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करें, घरेलू उद्योगों को बढ़ावा दें और वैश्वीकरण के दबाव के सामने अपनी सांस्कृतिक पहचान और संप्रभुता को बचाए रखें।
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मुफ़्त क्विज़ शुरू करें →कल्पना कीजिए एक ऐसे देश की जो अपनी दवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स और अनाज के लिए पूरी तरह हज़ारों मील दूर बैठे देशों पर निर्भर है। अचानक दुनिया में युद्ध या महामारी फैलती है, मालवाहक जहाज़ रुक जाते हैं, और देश के अस्पतालों में दवाइयाँ और फ़ैक्टरियों में सामान ख़त्म हो जाता है। एक राष्ट्रीय रूढ़िवादी कहेगा: हम अपने देश को कभी इतना लाचार नहीं छोड़ सकते। अपने कारख़ानों की रक्षा करें, अपनी सीमाओं को सुरक्षित करें, और देश को अपने पैरों पर खड़ा करें ताकि हमें जीने के लिए किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।
राष्ट्रीय रूढ़िवाद सांस्कृतिक मर्यादाओं को राष्ट्रीय संप्रभुता की अटूट भावना के साथ जोड़ता है। जहाँ मुक्त बाज़ार वाले खुली सीमाओं और बेलगाम वैश्वीकरण की वक़ालत करते हैं, वहीं राष्ट्रीय रूढ़िवादियों का मानना है कि इससे घरेलू उद्योग तबाह होते हैं, स्थानीय मज़दूरों का रोज़गार छिनता है और देश की आज़ादी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के हाथों गिरवी हो जाती है। वे राष्ट्र-राज्य को ही लोकतंत्र और संस्कृति का असली रक्षक मानते हैं।
भारत में 1947 से 1949 के बीच सरदार वल्लभभाई पटेल ने 560 से अधिक रियासतों को मिलाकर एक अखंड भारत बनाया। फ़्रांस में चार्ल्स डी गॉल ने 1958 में पंचम गणतंत्र की नींव रखकर एक स्वतंत्र विदेश नीति बनाई और देश को किसी भी महाशक्ति का पिछलग्गू बनने से रोका। 1939–1940 के शीतकालीन युद्ध में फ़िनलैंड ने अपनी एकता और देशभक्ति के बल पर सोवियत संघ की विशाल सेना के सामने अपनी आज़ादी की रक्षा की।
इस विचारधारा का मानना है कि देशभक्ति कोई पुरानी दकियानूसी सोच नहीं, बल्कि समाज को जोड़े रखने वाला सबसे मज़बूत धागा है। जब नागरिक अपने देश से गहरा लगाव महसूस करते हैं, तभी वे राष्ट्र के लिए त्याग करने को तैयार होते हैं।
ideoMap के चार पैमानों पर इसकी आम जगह।
प्रेरक उदाहरण
भारत · 1947–1949
सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने अदम्य साहस और दृढ़ कूटनीति से क़रीब 560 रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कर देश के टुकड़े होने से बचाया और एक संप्रभु, अखंड गणराज्य की नींव रखी।
प्रेरक उदाहरण
फ़्रांस · 1958–1969
राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल ने नया संविधान बनाकर राजनीतिक स्थिरता दी, स्वतंत्र परमाणु क्षमता विकसित की और शीतयुद्ध के दौर में भी फ़्रांस को अमेरिकी या सोवियत प्रभाव से पूरी तरह स्वायत्त रखा।
प्रेरक उदाहरण
फ़िनलैंड · 1939–1940
आबादी और हथियारों में बहुत छोटा होने के बावजूद फ़िनलैंड ने अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए अद्वितीय देशभक्ति और एकता दिखाई, सोवियत सेना के दाँत खट्टे किए और अपनी स्वतंत्रता बचाए रखी।
सबक़ देने वाला उदाहरण
पाकिस्तान · 1971
बंगाली भाषा, संस्कृति और चुनावी जनादेश को कुचलने के लिए सेना ने बर्बरता की, जिससे जंग छिड़ी और देश टूटकर दो टुकड़े हो गया।
सबक़ देने वाला उदाहरण
अमेरिका · 1930
घरेलू उद्योगों को बचाने की ज़िद में 20,000 से अधिक विदेशी सामानों पर भारी टैक्स लगा दिया गया; बदले में बाकी दुनिया ने भी अमेरिकी माल पर पाबंदियाँ लगा दीं, जिससे वैश्विक व्यापार 60% घट गया और महामंदी और गहरी हो गई।
सरदार वल्लभभाई पटेल
भारत · 1875–1950
भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री व गृह मंत्री, 'लौह पुरुष' जिन्होंने 560 से अधिक देशी रियासतों का भारत में ऐतिहासिक विलय कराया और आधुनिक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की नींव रखी।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी
भारत · 1901–1953
प्रखर राष्ट्रवादी राजनेता, शिक्षाविद और भारतीय जनसंघ के संस्थापक, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण संवैधानिक एकीकरण और 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक आंदोलन किया।
चार्ल्स डी गॉल
फ़्रांस · 1890–1970
द्वितीय विश्व युद्ध में स्वतंत्र फ़्रांसीसी सेना के नायक और पंचम गणतंत्र के संस्थापक, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर राष्ट्रीय संप्रभुता, गरिमा और सैन्य आत्मनिर्भरता की मिसाल क़ायम की।
जॉर्ज ऑरवेल ने लिखा था कि देशभक्ति स्वभाव से रक्षात्मक होती है — यह अपनी ज़मीन और जीवन-शैली से प्यार है, बिना इसे दूसरों पर थोपने की इच्छा के। इसके विपरीत, अंध-राष्ट्रवाद आक्रामक हो सकता है और सत्ता की भूख से संचालित हो सकता है। राष्ट्रीय रूढ़िवादी कहते हैं कि सच्चा राष्ट्रवाद असल में संगठित देशभक्ति है: अपने देश और उसकी संप्रभुता की रक्षा करना, बिना किसी दूसरे मुल्क को दबाए।
पारंपरिक रूढ़िवाद स्थानीय रीति-रिवाजों, धार्मिक मान्यताओं, पारिवारिक बंधनों और समाज के धीमे विकास पर ज़ोर देता है। राष्ट्रीय रूढ़िवाद अपना मुख्य ध्यान एक ताक़तवर राष्ट्र-राज्य, सुरक्षित सीमाओं, राष्ट्रीय संप्रभुता और विदेशी प्रभाव से देश को बचाने पर केंद्रित करता है। यह देश के हित में सरकार द्वारा संरक्षणवादी नीतियाँ लागू करने से भी नहीं हिचकता।
इसके फ़ायदे और नुक़सान दोनों हैं। देश में ज़रूरी दवाइयाँ, रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा का निर्माण करना भारत को विदेशी दबाव और युद्ध के समय लाचार होने से बचाता है। लेकिन विदेशी व्यापार को पूरी तरह बंद कर देना और अकुशल घरेलू कंपनियों को बचाने से 1991 से पहले जैसा 'लाइसेंस राज' पैदा हो सकता है। इसलिए आज रणनीतिक आत्मनिर्भरता को सही माना जाता है, अंध-अलगाववाद को नहीं।
क़रीब 2 मिनट में 12 आसान सवालों के जवाब दीजिए। मुफ़्त, बिना साइन-अप।
मुफ़्त क्विज़ शुरू करें →ये उदाहरण सोचने में मदद के लिए आसान बनाकर लिखे गए हैं। इनका मक़सद किसी देश, पार्टी या लोगों की तारीफ़ या बुराई करना नहीं है।